“खेलत रास रसिक नंदलाल, जमुना पुलिन सरद निशि सोभित, रचि मंडल ठाढ़ी ब्रजबाल | ”
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (626)
श्री कृष्ण शरद पूर्णिमा की रात्रि में गोपियों संग रास खेल रहे हियँ और समस्त गोपी जन वृन्दावन में यमुना के तट पर गायन और नृत्य कर रहे हैं।
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (626)
श्री कृष्ण शरद पूर्णिमा की रात्रि में गोपियों संग रास खेल रहे हियँ और समस्त गोपी जन वृन्दावन में यमुना के तट पर गायन और नृत्य कर रहे हैं।

