“जय कोटि काम अभिराम हरे, रस बरसावत ब्रज धाम हरे |” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज जिनका सौंदर्य लाखों कामदेव को भी लज्जित करने वाला है और जो ब्रज में निरंतर रस बरसाते हैं उन श्री कृष्ण की जय हो।