बनि अलमस्त नाम गुन गाउँ, शरणागत - भय हारिणि के |
जूठनि खाऊँ ‘कृपालु’ जाऊँ बलि, नित नीलांबरधारिणि के ||
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा, श्री राधा मधुरी (52)
हम शरणागत के भय को दूर करने वाली लाड़लीजी के नाम एवं गुणों को गाते हुए मतवाले बने रहते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि मैं तो नीलाम्बर धारण करने वाली वृषभानुनन्दिनी राधिका की झूठन खाकर बलिहार जाता हूँ |
जूठनि खाऊँ ‘कृपालु’ जाऊँ बलि, नित नीलांबरधारिणि के ||
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा, श्री राधा मधुरी (52)
हम शरणागत के भय को दूर करने वाली लाड़लीजी के नाम एवं गुणों को गाते हुए मतवाले बने रहते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि मैं तो नीलाम्बर धारण करने वाली वृषभानुनन्दिनी राधिका की झूठन खाकर बलिहार जाता हूँ |

