निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने - भगवान शंकर जी, राधा कृपा कटाक्ष

निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने - भगवान शंकर जी, राधा कृपा कटाक्ष

निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्॥ (३)
- भगवान शंकर जी

हे राधे, आप श्री नन्दकिशोर को निरंतर अपने बस में किये रहती हैं, हे जगज्जननी वृन्दावनेश्वरी माँ! आप मुझे कब अपनी कृपा दृष्टि से कृतार्थ करोगी ?
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