गहवर मंजु कुंज मध्य राधे, लतन लिपट रोऊँ राधे - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

गहवर मंजु कुंज मध्य राधे, लतन लिपट रोऊँ राधे - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

"गहवर मंजु कुंज मध्य राधे, लतन लिपट रोऊँ राधे"
- ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

हे किशोरी जू ! वो दिन कब आएगा, जब मैं गहवर वन के कुंजो में लता- पताओं से लिपट कर आपकी याद में रोऊँगा ?