नहिं मान्यो अपराध पूतनहिं, गरल पिवावन वारी के - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी

नहिं मान्यो अपराध पूतनहिं, गरल पिवावन वारी के - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी

नहिं मान्यो अपराध पूतनहिं, गरल पिवावन वारी के।
दै "कृपालु" निज लोक मातु सम,को पटतर बनवारी के।।

- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी

श्याम सुंदर इतने कृपालु हैं कि पूतना ने श्री कृष्ण को अपना ज़हर पिलाना चाहा, और उसका अपराध ज़हर पिलाने वाला न देखते हुए उन्होंने पूतना को अपनी माँ मान कर अपने निज धाम की गति प्रदान की। श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं, उनसे अधिक उदार कौन हो सकता है?