उधो, मन न भए दस बीस - श्री सूरदास
- श्री सूरदास जी
गोपियां कहती है, हे उद्धव, मन तो हमारा एक ही है, दस-बीस मन तो हैं नहीं कि एक को किसी के लगा दें और दूसरे को किसी और में। अब वह भी नहीं है, कृष्ण के साथ अब वह भी चला गया हमारा नहीं रहा ।
- श्री सूरदास जी
गोपियां कहती है, हे उद्धव, मन तो हमारा एक ही है, दस-बीस मन तो हैं नहीं कि एक को किसी के लगा दें और दूसरे को किसी और में। अब वह भी नहीं है, कृष्ण के साथ अब वह भी चला गया हमारा नहीं रहा ।

