"तेरे रस का लगा चस्का जिसको, लगता बैकुंठ फीका सा उसको"
- ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज
जिसे ब्रज रस (ब्रज का आनंद) का चस्का लग जाये, उसको बैकुंठ का रस भी फीका लगता है।
- ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज
जिसे ब्रज रस (ब्रज का आनंद) का चस्का लग जाये, उसको बैकुंठ का रस भी फीका लगता है।

