श्याम गए मथुरा न गइ ब्रज बामा।
श्याम रूचि महँ रूचि राखें आठों यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (249)
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी । उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।
श्याम रूचि महँ रूचि राखें आठों यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (249)
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी । उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।

