माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (248)

माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (248)

माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा।
माधुर्य में भी रह भाव निष्कामा॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (248)

ब्रज की सखियों का श्यामा श्याम के प्रति ब्रज में माधुर्य भाव था, माधुर्य में भी निष्काम भाव था।