प्रेम देखना जो चाहो चलो ब्रज धामा।
श्याम सुख माने निज सुख ब्रज बामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, श्यामा श्याम गीत (236)
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्याम सुन्दर के सुख में ही मानती थी।
श्याम सुख माने निज सुख ब्रज बामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, श्यामा श्याम गीत (236)
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्याम सुन्दर के सुख में ही मानती थी।

