सदा राधिका नाम , जिह्वा ग्रह स्थात्। सदा राधिका रुप - श्री निम्बार्काचार्य

सदा राधिका नाम , जिह्वा ग्रह स्थात्। सदा राधिका रुप - श्री निम्बार्काचार्य

सदा राधिका-नाम जिह्वाग्रतः स्यात् सदा राधिकारूपमक्ष्यग्रमास्ताम्।
श्रुतौ राधिकाकीर्तिरन्तः स्वभावे, गुणा राधिकायाः श्रिया एतदीहे ।।
- जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री राधाष्टकम (08)

मेरी जिह्वा के अग्रभाग पर सदा श्रीराधिका का नाम विराजमान रहे । मेरे नेत्रों के समक्ष सदा श्रीराधा का ही रूप प्रकाशित हो । कानों में श्रीराधिका की कीर्ति-कथा गूंजती रहे और अन्तर्हदय में श्रेय अधिष्ठात्री श्रीराधा के ही असंख्य गुणगणों का चिन्तन हो, यही मेरी शुभकामना है ।।८।।