जो कह्यौ श्री हरिवंश रस, बिरलौ समुझनहार।
एक दोइ जो पाइयै, खोजत सब संसार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रहस्य लता (1)
श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने जिस दिव्य वृन्दावन रस का वर्णन किया है, उसे समझने वाला कोई विरला (अत्यंत दुर्लभ) ही होता है। ऐसे रसिक जन पूरे संसार में खोजने पर भी मुश्किल से एक या दो ही मिलते हैं।
एक दोइ जो पाइयै, खोजत सब संसार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रहस्य लता (1)
श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने जिस दिव्य वृन्दावन रस का वर्णन किया है, उसे समझने वाला कोई विरला (अत्यंत दुर्लभ) ही होता है। ऐसे रसिक जन पूरे संसार में खोजने पर भी मुश्किल से एक या दो ही मिलते हैं।

