"ब्रजन्ति गावो यस्मिन्नति ब्रज" -जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज

"ब्रजन्ति गावो यस्मिन्नति ब्रज" -जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज

"ब्रजन्ति गावो यस्मिन्नति ब्रज"

वेदों में ब्रज शब्द का उपयोग उस स्थान के रूप में भी किया गया है जहां गाय निवास करती हैं एवं चरती हैं।