"अब मैं वृन्दावन रस पायौ, श्री राधा चरन सरन मन, दीनो मोहन लाल रिझायो ||"
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (136)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि "अब जाकर मैंने वृन्दावन के विलक्षण रस को प्राप्त किया है। श्री राधारानी की जैसे ही मैंने चरण शरण ग्रहण करी उसी क्षण श्री मोहन लाल रीझ गए।
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (136)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि "अब जाकर मैंने वृन्दावन के विलक्षण रस को प्राप्त किया है। श्री राधारानी की जैसे ही मैंने चरण शरण ग्रहण करी उसी क्षण श्री मोहन लाल रीझ गए।

