तवैवास्मि तवैवास्मि न जीवामि त्वया विना।
इति विज्ञाय देवि त्वं नय मां चरण अन्तिकम् । ।96।।
- श्री रघुनाथ दास, विलाप कुसुमांजलि (96)
हे स्वामिनि ! मैं आपकी हूँ, आपकी ही हूँ। आपके बिना तो मैं जीवित ही नहीं रह सकती-यह जानकर आप मुझे अपने श्रीचरणों की शरण में रख लीजिये ।।
इति विज्ञाय देवि त्वं नय मां चरण अन्तिकम् । ।96।।
- श्री रघुनाथ दास, विलाप कुसुमांजलि (96)
हे स्वामिनि ! मैं आपकी हूँ, आपकी ही हूँ। आपके बिना तो मैं जीवित ही नहीं रह सकती-यह जानकर आप मुझे अपने श्रीचरणों की शरण में रख लीजिये ।।

