यत्र वृन्दावनं नास्ति न यत्रा यमुना नदी
यत्र गोवर्धनो नास्ति तत्र में न मनह सुखम
- गर्ग संहिता, गो० सा० (3.32)
श्री राधा रानी ने कहा: मेरा दिल ऐसे स्थान पर खुश नहीं हो सकता है जहां कोई वृंदावन, यमुना नदी नहीं है, और कोई गोवर्धन पर्वत नहीं है।
यत्र गोवर्धनो नास्ति तत्र में न मनह सुखम
- गर्ग संहिता, गो० सा० (3.32)
श्री राधा रानी ने कहा: मेरा दिल ऐसे स्थान पर खुश नहीं हो सकता है जहां कोई वृंदावन, यमुना नदी नहीं है, और कोई गोवर्धन पर्वत नहीं है।

