आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ - स्कन्द पुराण, भागवत माहात्म्य (2.6.1.22)

आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ - स्कन्द पुराण, भागवत माहात्म्य (2.6.1.22)

आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ
आत्माराम तथा प्राज्ञै: प्रोच्यतेगूढ़ वेदिभि:   
- स्कन्द पुराण, भागवत माहात्म्य (2.6.1.22)

श्री कृष्ण कहते हैं की श्री राधा ही मेरी आत्मा है और मैं उन्ही में रमन करता हूँ, इसीलिए मैं श्री राधा की निरंतर भक्ति करता हूँ एवं आत्मरमण नाम से विख्यात हूँ ।