परम पावन करुवा कौ पानी।
जाके पियत हृदय में आवत, मोहन राधारानी॥ [1]
अनुभव प्रकट होत क्रीड़ा को, मोद बिनोद कहानी।
भगवतरसिक निकुंज - महल की, टहल मिलै मनमानी॥ [2]
जाके पियत हृदय में आवत, मोहन राधारानी॥ [1]
अनुभव प्रकट होत क्रीड़ा को, मोद बिनोद कहानी।
भगवतरसिक निकुंज - महल की, टहल मिलै मनमानी॥ [2]
- श्री भगवत रसिक जी, श्री भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिश्चयात्म ग्रन्थ, पूर्वार्द्ध (10)
भगवतरसिक जी कहते हैं कि ब्रज-रज से निर्मित करवे का जल परम पवित्र होता है। इस करवे का जल पीते ही श्री प्रियाप्रियतम सहज ही हृदय में आ विराजमान हो जाते हैं। [1]
आनन्द-विनोद की कथाओं से परिपूर्ण नित्य-विहार लीला का अनुभव प्रकट होने लगता है तथा निकुञ्ज-महल की मनोवाञ्छित सेवा प्राप्त हो जाती है। [2]
आनन्द-विनोद की कथाओं से परिपूर्ण नित्य-विहार लीला का अनुभव प्रकट होने लगता है तथा निकुञ्ज-महल की मनोवाञ्छित सेवा प्राप्त हो जाती है। [2]

