बलि जाउँ लाड़ली लाल की

बलि जाउँ लाड़ली लाल की

बलि जाउँ लाड़ली लाल की |
गरबाहीं दीने दोउ विहरत, कुंज – लतान तमाल की |

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (09)

भावार्थ – मैं राधा – कृष्ण पर बार – बार बलि - बलि जाता हूँ | राधाकृष्ण परस्पर गले में हाथ डाले हुए तमाल लता की कुंजों में विहार कर रहे हैं |