यदपि ‘कृपालु’ एक दोउ स्वामिनि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

यदपि ‘कृपालु’ एक दोउ स्वामिनि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

यदपि ‘कृपालु’ एक दोउ स्वामिनि, स्वामिनि तदपि गुपाल की ||
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (09)

जगद्गुरु कृपालु जी’ कहते हैं कि यद्यपि ये दोनों परस्पर अभिन्न हैं, फिर भी रसिकों के दृष्टिकोण से किशोरी जी श्यामसुन्दर की स्वामिनी हैं |