चलो मन श्री वृंदावन धाम |
जहां विहरत नागरि अरु नागर कुंजनि आठों याम ||
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, धाम-माधुरी (01)
जहां विहरत नागरि अरु नागर कुंजनि आठों याम ||
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, धाम-माधुरी (01)
रे मन! आप वृंदावन में अवश्य निवास करें जहाँ राधा कृष्ण हमेशा दिन रात कुंज में विहार करते हैं।

