बार बार सोचो ये गोविंद राधे, एक दिन ब्रज रस पियूँगा बतादे - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

बार बार सोचो ये गोविंद राधे, एक दिन ब्रज रस पियूँगा बतादे - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

"बार बार सोचो ये गोविंद राधे,
एक दिन ब्रज रस पियूँगा बतादे।"

- राधा गोविंद गीत, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज (5937)

बार-बार सोचना चाहिए कि एक दिन मैं ब्रज रस (ब्रज वृंदावन का आनंद) जरूर पीऊंगा।