रहो रे मन! गौर चरण लव लाइ - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

रहो रे मन! गौर चरण लव लाइ - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

“रहो रे मन! गौर चरण लव लाइ,
जिन चरनन चरण-रेणुका, सेवत श्याम सदाई। "

- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी (91)

रे मन! श्री राधा के चरण कमलों के प्रति प्रेम विकसित कर। सर्वोच्च भगवान श्री कृष्ण भी इन पावन चरणों की रज को नित्य ही सेवन करते हैं ।