युगलवर निरतत कुंज मझार   - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा

युगलवर निरतत कुंज मझार   - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा

“युगलवर निरतत कुंज मझार।
देखति ललितादिक सखियन सब, पुनि पुनि बलि बलिहार”

  - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा
   
युगल वर कुञ्ज में विहार कर रहे हैं। सखियाँ, ललिता आदि बार-बार बलिहार बलिहार कह रही हैं।