आधौ नाम तारिहै राधा - श्री अली किशोरी

आधौ नाम तारिहै राधा - श्री अली किशोरी

आधौ नाम तारिहै राधा।
'रा' के कहत रोग सब मिटिहैं, 'धा' के कहत मिटै सब बाधा॥ [1]
राधा राधा नाम की महिमा, गावत वेद पुराण अगाधा।
अलि किशोरी रटौ निरंतर, वेगहि लग जाय भाव समाधा॥ [2]

- श्री अली किशोरी

‘राधा’ नाम के अर्धांश, अर्थात् ‘रा’ का रूप-ध्यानयुक्त उच्चारण करते ही समस्त मानस-रोग मिट जाते हैं, और ‘धा’ कहते ही जीव की समस्त बाधाएँ दूर हो जाती हैं। [1]

वेदों और पुराणों में राधा-नाम की ही महिमा का मंडन है, किन्तु वे भी ‘नेति-नेति’ कहकर मानो हार मान जाते हैं। रसिक संत अलि किशोरी जी कहते हैं कि राधा-नाम का रूप-ध्यानयुक्त निरन्तर रटन करने से शीघ्र ही भाव-समाधि में प्रवेश प्राप्त हो जाता है। [2]