“सुमिरन कर ले मना, छिन छिन राधा रमरमना।
यह जग नहिं अपना, जाना होगा घर सजना। "
- सुमिरन कर ले मना, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज
हे मन ! क्षण क्षण श्री राधा रमन का सुमिरन कर ले, यह जग तेरा नहीं है, तुझे अपने सजना श्री राधा रमन के घर जाना है।
यह जग नहिं अपना, जाना होगा घर सजना। "
- सुमिरन कर ले मना, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज
हे मन ! क्षण क्षण श्री राधा रमन का सुमिरन कर ले, यह जग तेरा नहीं है, तुझे अपने सजना श्री राधा रमन के घर जाना है।

