अद्वितीय इक तत्व है, राधा तत्व प्रधान।
याको दूजो रूप है, स्वयं कृष्ण भगवान॥
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, भक्ति शतक (1)
याको दूजो रूप है, स्वयं कृष्ण भगवान॥
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, भक्ति शतक (1)
केवल एक सर्वोच्च एवं अद्वितीय तत्त्व है जिसकी कोई समानता ही नहीं—वह हैं श्री राधा। श्रीकृष्ण तो उन्हीं का दूसरा स्वरूप हैं।

