“प्राकृत वृन्दावन में गोविन्द राधे, दिव्य वृन्दावन है व्याप्त बतादे. ” - राधा गोविंद गीत - 5918, जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज इस भौतिक वृन्दावन में, दिव्य वृंदावन व्याप्त है।