चक्रं चक्री शूलमादाय शूलिपाशं पाशी वज्रमादय वज्री ।
धावन्त्यग्रे पृष्ठतो ब्राह्मतश्व राधा राधा वादिनो रक्षणाय ॥
- ब्रह्म वैवर्त पुराण एवं श्री हरि लीलामृत तंत्र
धावन्त्यग्रे पृष्ठतो ब्राह्मतश्व राधा राधा वादिनो रक्षणाय ॥
- ब्रह्म वैवर्त पुराण एवं श्री हरि लीलामृत तंत्र
जो कोई निरंतर राधा नाम लेता है, उस जीव की रक्षा हेतु भगवान विष्णु चक्र धारण करके, इन्द्र वज्र लेकर, शंकरजी त्रिशूल लेकर उसके रक्षक बने रहते हैं।

