"टुक निज-जन क्रंदन सुनी पावे, तजि श्याम हू निज जन पह धावे, जब ऐसी सरल सुकुमार,फिकिर मोहि काहे की|"
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज
हमारी स्वामिनी जी अपने शरणागत की थोड़ी भी करूण-पुकार सुनते ही अपने प्राणेश्वर श्यामसुंदर को भी छोड़कर अपने जन के पास तत्क्षण अपनी सुधि-बुधि भूलकर दौड़ आती है| जब हमारी किशोरी जी इतनी सुकुमार और सरल स्वभाव की है, तब मुझे किस बात की चिंता है|

