श्री कृष्ण, श्री राधा रानी के प्राणनाथ हैं, वे ब्रज से बाहर नहीं जाते हैं किन्तु इस रहस्य को बहुत कम लोग जानते हैं। हमें यह विचार नहीं करना चाहिए कि श्री कृष्ण ब्रज छोड़कर चले गए थे। भगवान ब्रज से कहीं नहीं जाते हैं, तब प्रश्न है कि मथुरा द्वारिका की लीला फिर कैसे हुई ? तो रसिक संत उत्तर दे रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण के अवतार के समय उन्हीं में श्री नारायण, श्री विष्णु, श्री महाविष्णु सब लीन हो गये थे। नारायणांश वाले श्री कृष्ण को भगवान द्वारिका भेज देते हैं, स्वयं नहीं जाते हैं। श्री राधा रानी को साथ लेकर गोलोक जाते हैं, इसलिए ब्रज वासियों ने कहा था - "हमारो मुरली वारो श्याम "हमारा तो वंशी वाला श्री कृष्ण ही एकमात्र सब कुछ है । द्वारिका, मथुरा वाले श्री कृष्ण को हम नहीं जानते हैं। ब्रज रसिक संत रुप गोस्वामी ने उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'भक्ति रसामृत सिन्धु' में यह वर्णन किया है।

श्री कृष्ण ब्रज से कहीं नहीं जाते हैं, तब प्रश्न है कि द्वारिका की लीला फिर कैसे हुई ?
श्री कृष्ण, श्री राधा रानी के प्राणनाथ हैं, वे ब्रज से बाहर नहीं जाते हैं किन्तु इस रहस्य को बहुत कम लोग जानते हैं। हमें यह विचार नहीं करना चाहिए कि श्री कृष्ण ब्रज छोड़कर चले गए थे। भगवान ब्रज से कहीं नहीं जाते हैं, तब प्रश्न है कि मथुरा द्वारिका की लीला फिर कैसे हुई ? तो रसिक संत उत्तर दे रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण के अवतार के समय उन्हीं में श्री नारायण, श्री विष्णु, श्री महाविष्णु सब लीन हो गये थे। नारायणांश वाले श्री कृष्ण को भगवान द्वारिका भेज देते हैं, स्वयं नहीं जाते हैं। श्री राधा रानी को साथ लेकर गोलोक जाते हैं, इसलिए ब्रज वासियों ने कहा था - "हमारो मुरली वारो श्याम "हमारा तो वंशी वाला श्री कृष्ण ही एकमात्र सब कुछ है । द्वारिका, मथुरा वाले श्री कृष्ण को हम नहीं जानते हैं। ब्रज रसिक संत रुप गोस्वामी ने उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'भक्ति रसामृत सिन्धु' में यह वर्णन किया है।
