श्री किशोरी अली जी की जीवनी : ब्रज के रसिक संत

श्री किशोरी अली जी की जीवनी : ब्रज के रसिक संत

यह कुछ ही साल पुरानी कथा है । एक सज्जन बरसाना के गहवर वन में घूम रहे थे । बहुत घबराए हुए अपनी मृत पत्नी को 'किशोरी किशोरी' बुलाते हुए जा रहे थे, इतने में राधा रानी अपनी सखीयाँ सहित आ गयी, वो यह नाम सुनकर आचम्भित हुई और ललिता सखी को पूछने लगी, यह कौन है जो मेरा नाम इतनी करुण क्रंदन युक्त ले रहा है।

सखी उनको समझाने लगी, हे राधा रानी, यह आपको नहीं बुला रहा है, ये अपनी पत्नी किशोरी की मृत्यु से बेचैन है। अकारण करुण श्री राधा प्यारी बोली, हे सखी! यह गहवर वन में ये मेरा ही नाम ले रहा है। उसको मेरे पास बुलाओ। राधा रानी ने उन पर कृपा दृष्टि डाल उनपर कृपा कर दी। यह दिव्य लीला उस सज्जन के साथ ही हुई। और इस लीला को देखते देखते वो मूर्छित हो गए । इसके बाद वो "किशोरी अली" नाम से राधा रानी के भक्त बन गए । राधा रानी की अपार कृपा और प्रेम पाकर वो दिव्य शरीर प्राप्त किये और दिव्य लीला में प्रवेश किए । वे गहवर वन में वास किए। किशोरी अली जी की समाधि श्रीकृष्ण कुण्ड [श्री राधा सरोवर]के पास लता- पत्तों के बीच स्थित है । यह भक्तों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

श्री किशोरी अलि जी का एक प्रसिद्ध पद जिन्हें ब्रज में सभी गाते हैं वह इस प्रकार है:

आधौ नाम तारिहै राधा |
'रा' के कहत रोग सब मिटिहैं, 'धा' के कहत मिटै सब बाधा ||
राधा राधा नाम की महिमा, गावत वेद पुराण अगाधा |
अलि किशोरी रटौ निरंतर, वेगहि लग जाय भाव समाधा ||

- श्री अली किशोरी

राधा नाम का अर्धांश अर्थात 'रा' का रूपध्यान युक्त उच्चारण करते समस्त मानस रोग मिट जाते हैं, ‘धा' कहते ही जीव की समस्त बाधाएं मिट जाती हैं। वेदो और पुरानो में राधा नाम का ही महिमा मंडन है किन्तु वो भी 'नेती नेती' कहकर हार मान जाते है। रसिक संत अलि किशोरी जी कहते हैं राधा नाम का रूप ध्यान युक्त निरंतर रटन करने से जल्द ही भाव समाधि में प्रवेश मिल जाता है।