हमारे मन, बसे युगल सरकार।
गौर वरनि वृषभानुनंदिनी, नील वरन रिझवार।
गरबाहीं दीने दोउ ठाढ़े, मंजु निकुंज मझार। [1]
उत पहिरे नीलांबर सोहति, इत पीतांबर धार।
उत सोरह सिंगार सजीं इत, नटवर भेष सँवार। [2]
उत सिंगार मध्य छवि सोहति, इत छवि मधि श्रृंगार।
बड़भागी ‘कृपालु’ जिन छिन – छिन, जोरी युगल निहार। [3]
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (19)
हमारे मन में श्यामा-श्याम युगल सरकार बसे हुए हैं।
वृषभानुनन्दिनी गौर-वर्ण की हैं और नन्दकुमार नील-वर्ण के हैं।
सुन्दर निकुञ्ज के मध्य दोनों एक-दूसरे के गले में हाथ डाले विराजमान हैं। [1]
गौर वरनि वृषभानुनंदिनी, नील वरन रिझवार।
गरबाहीं दीने दोउ ठाढ़े, मंजु निकुंज मझार। [1]
उत पहिरे नीलांबर सोहति, इत पीतांबर धार।
उत सोरह सिंगार सजीं इत, नटवर भेष सँवार। [2]
उत सिंगार मध्य छवि सोहति, इत छवि मधि श्रृंगार।
बड़भागी ‘कृपालु’ जिन छिन – छिन, जोरी युगल निहार। [3]
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (19)
हमारे मन में श्यामा-श्याम युगल सरकार बसे हुए हैं।
वृषभानुनन्दिनी गौर-वर्ण की हैं और नन्दकुमार नील-वर्ण के हैं।
सुन्दर निकुञ्ज के मध्य दोनों एक-दूसरे के गले में हाथ डाले विराजमान हैं। [1]
किशोरी जी नीलाम्बर धारण किए हुए हैं तथा श्यामसुन्दर पीताम्बर धारण किए हुए हैं।
किशोरी जी ने सोलहों प्रकार के श्रृंगार धारण किए हैं और श्यामसुन्दर ने नटवर-वेश का श्रृंगार किया है। [2]
किशोरी जी ने सोलहों प्रकार के श्रृंगार धारण किए हैं और श्यामसुन्दर ने नटवर-वेश का श्रृंगार किया है। [2]
इधर श्रृंगार-स्वरूप किशोरी जी के हृदय में छवि-स्वरूप श्रीकृष्ण का निवास है,
उधर छवि-स्वरूप श्रीकृष्ण के हृदय में श्रृंगार-स्वरूप श्रीराधा का निवास है।
‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं— वे जन परम भाग्यशाली हैं, जो प्रिया-प्रियतम की युगल-जोड़ी का नित्य दर्शन करते हैं। [3]
उधर छवि-स्वरूप श्रीकृष्ण के हृदय में श्रृंगार-स्वरूप श्रीराधा का निवास है।
‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं— वे जन परम भाग्यशाली हैं, जो प्रिया-प्रियतम की युगल-जोड़ी का नित्य दर्शन करते हैं। [3]

