श्री राधा राधारानी के पग पग पर प्रयाग - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (29)

श्री राधा राधारानी के पग पग पर प्रयाग - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (29)

(कवित्त)
श्री राधारानी के पग पग पर प्रयाग।
जहाँ केशव की केलि-कुञ्ज, कोटि-कोटि काशी है॥ [1]
यमुना में जगन्नाथ, रेणुका में रामेश्वर।
तरु-तरु पे पड़े रहत, अयोध्या निवासी हैं॥ [2]
गोपिन के द्वार पर, हरिद्वार बसत जहाँ।
बद्री, केदारनाथ, फिरत दास-दासी हैं॥ [3]
तो स्वर्ग, अपवर्ग हम लेकर करेंगे क्या।
जान लो हमें हम वृन्दावन वासी हैं॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (29)

श्रीराधारानी के प्रत्येक कदम पर तीर्थराज प्रयाग विद्यमान है, और जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की लीला-कुंजें हैं, वहाँ करोड़ों काशी निवास करती हैं। [1]

यहाँ की यमुना जी में श्री जगन्नाथपुरी और चरण-रज के कण-कण में रामेश्वरम का वास है, तथा वृंदावन के प्रत्येक वृक्ष के नीचे अयोध्या के निवासी निवास करते हैं। [2]

जहाँ गोपियों के द्वारों पर साक्षात हरिद्वार बसता है और बद्रीनाथ तथा केदारनाथ दास-दासी बनकर सेवा में फिरते हैं। [3]

ऐसे परम धाम की प्राप्ति के बाद हम स्वर्ग और मोक्ष का लेकर क्या करेंगे, यह अच्छी तरह जान लो कि हम श्रीवृंदावन के निवासी हैं। [4]