दिव्य क्रीडा दर्शन, कुसुम सरोवर, श्री ब्रजधाम

दिव्य क्रीडा दर्शन, कुसुम सरोवर, श्री ब्रजधाम


एक दिन सुबह श्री राधारानी और उनकी सखियाँ कुसुम-सरोवर के किनारे बेली, चमेली, जूही, कनरा, चंपक और अन्य फूलों को चुनने के लिए आईं, जो यहाँ खिले हुए थे। श्री राधा रानी ने एक वृक्ष में फूलों से भरी शाखा को देखा । इधर नटखट श्री कृष्ण जानते थे कि यहाँ फूलो से भरी शाखा है तो यहाँ श्री राधा जरुर फूल लेने आएंगी, श्री कृष्ण ने उसी शाखा के फूलो के पीछे छुप कर अपने वज़न से उस शाखा को झुका दिया । ताकि श्री राधा रानी को वह नजर में न आएं । अब जैसे श्री राधा रानी आयीं और एक हाथ से उस डाली को खिची और दुसरे हाथ से फूलो को लेने लगीं तब अचानक नटखट श्री कृष्ण उस शाखा से दूसरी शाखा पर चले गए। श्री राधा ने एक हाथ से शाखा को पकड़ा था, सो शाखा ऊपर को उठ गई और श्री राधा लटक गई और सहायता के लिये पुकारने लगीं, इतने में श्री कृष्ण उस शाखा से उतर गए और श्री राधा को अपने दोनों करकमलो से ह्रदय से लगा लिया। यह देख सखियाँ हसने लगीं और तालियां बजाने लगीं। श्री राधा रानी ने तुरंत अपने को श्री कृष्ण से विलग किया और उन्हें डाँट लगाई।