नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधे  - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (६०)

नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधे - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (६०)

(राग काफी)
नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधे ।
कानन राधे तानन राधे भानन राधे हितवित राधे॥
दुःख में राधे, सुख में राधे, मुख में राधे, उर चित राधे ।
ललित किशोरी इत-उत राधे जित देखौं मैं तित तित राधे॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (६०)

श्री राधा मेरी आंखों में हैं, श्री राधा मेरी बोलनी में हैं, श्री राधा मेरे इशारों में हैं और केवल श्री राधा ही मेरी करनी में है।
श्री राधा मेरे कानों में हैं, श्री राधा मेरे गायन में हैं, श्री राधा मेरी चेतना में हैं, केवल श्री राधा ही मेरा हित हैं।
श्री राधा मेरे दुख में हैं, श्री राधा मेरी खुशी में हैं, श्री राधा मेरे मुख में हैं, केवल श्री राधा ही मेरे हृदय में रहती हैं।
श्री ललित किशोरी, वृंदावन के रसिक संत कहते हैं कि वह जहाँ भी देखते हैं केवल और केवल श्री राधा ही दिखती हैं।