प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ - स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (6)

प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ - स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (6)

(राग कानहरौ)
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ अपनपौं देखत,
तैसो तुम देखति हो किधौं नाहीं॥
हौं तोसौं कहौं प्यारे, आँखिन मूंदी रहौं,
लाल निकसि कहूं जाहिं॥ 

- स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (6)

लाल जी प्रिया जी से कह रहे हैं- हे प्यारी जी ! आपके रस भरे नयनों में मैं अपनापन देख रहा हूँ । क्या आप भी मेरे नयनों में उसी भाँति अपनापन देख रही हैं या नहीं ? प्यारी जी कहने लगी - हे प्यारे ! तुम को मेरी आँखों में बंद कर लूंगीं, मूँद कर रख लूंगीं । देखने की बात क्या कहते हो ? हे प्यारे लाल ! निकल कर कहाँ जाओगे ? नैन रुपी कुंजो में बसों ।