भजो मन राधा राधा राधा, राधा राधा राधा -जगद्गुरु श्री कृपालु जी महराज, ब्रज रस माधुरी

भजो मन राधा राधा राधा, राधा राधा राधा -जगद्गुरु श्री कृपालु जी महराज, ब्रज रस माधुरी

भजो मन राधा राधा राधा, राधा राधा राधा।
हे मेरे मन, तू श्री राधा रानी का भजन कर।

रसना नित रस पिवु बिनु बाधा, नाम सुधा रस राधा, राधा राधा।
हे मन, तू रसना से नित्य श्री राधा नाम सुधा रस का पान कर बिना किसी बाधा के।

श्रवण सुनहु नित लीला राधा, अगनित गुन गन राधा, राधा राधा राधा।
अपने कानों से नित्य श्री राधा रानी के अनंत गुण तथा लीलाओं को सुन।

जेहि हरिहूँ अवराधा, राधा राधा राधा।
हे मन, जिन श्री राधा की आराधना श्री हरी करते हैं, उनही श्री राधा का भजन कर।

नैनन ध्यान नित छवि राधा, लखु जिते तित राधा, राधा राधा राधा।
अपने नेत्रों में श्री राधारानी की छवि नित्य के लिए बसा ले, जिससे तू जहां भी देखे वहाँ वहाँ केवल श्री राधा ही दिखाई दें। 

नासा ध्यान करहु नित राधा, दिव्य गन्ध तनु राधा, राधा राधा राधा।
श्री राधारानी के अंगों से दिव्य सुगंधी का निर्झरण नित्य होता रहता है, इसलिए हे मन, तू अपने घ्राणेंद्रिय को श्री राधा के दिव्य सुगंध मे लगा।

मन धरु ध्यान रैन दिन राधा, जेहि छवि सम छवि राधा, राधा राधा राधा।
हे मन, तू रात दिवस केवल श्री राधारानी का ही ध्यान कर, क्यूंकी श्री राधारानी की छवि की सुंदरता के समान समस्त ब्रह्मांडों में केवल श्री राधा की छवि ही है।

बुद्धि परतीति दृढ़ एक दिन राधा, अपनाहिं मोहिं राधा, राधा राधा।
हे मन, तू दृढ़ विश्वास रख की एक दिन श्री राधा मुझे अवश्य ही अपनाएँगी।

प्रेम अकाम रहे नित राधा, सुख मानहुँ सुख राधा, राधा राधा राधा।
श्री राधारानी के चरणों मे निष्काम प्रेम नित्य बना रहे, श्री राधारानी के सुख मे ही सुखी हो।

चाहु 'कृपालु' कृपा जो राधा, कृष्णहु भजु संग राधा, राधा राधा राधा।
जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं "यदि तुम्हें श्री राधा की कृपा प्राप्त करनी है, तो श्री राधा के संग श्री कृष्ण का भी भजन करो।"

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महराज, ब्रज रस माधुरी