श्री रूप गोस्वामी द्वारा राधा और श्री कृष्ण की अद्बुत झूलन लीला के दर्शन

श्री रूप गोस्वामी द्वारा राधा और श्री कृष्ण की अद्बुत झूलन लीला के दर्शन

राधा कुंड, गोवर्धन में एक ऐसा अद्भुत स्थान है जहाँ एक बहुत बड़ा इमली का वृक्ष है । यह वही स्थान है जहाँ रूप गोस्वामी ने राधा और श्री कृष्ण की सबसे अविश्वसनीय झूलन लीला के दर्शन किए थे।

'इमली' शब्द इमली से है और 'तला' का अर्थ है 'वृक्ष'। एक बार श्री रूप गोस्वामी राधा-कुंड में कुछ समय बिता रहे थे, वह आये और इस विशाल इमली के वृक्ष के नीचे बैठ गए और स्मरण में तल्लीन हो गए । वहां उन्होंने वृक्ष से सटे एक झूले को देखा। वह झूला इस प्रकार का था की दो व्यक्ति एक दूसरे के सामने ही बैठ सकते हैं । फिर अचानक, रूप गोस्वामी ने देखा कि राधा और श्री कृष्ण दोनों सखियों के संग झूलन लीला में पधारे। श्री कृष्ण तुरंत झूले पर चढ़ गए और फिर श्री राधा रानी को उनके साथ सम्मिलित करने के लिए आमंत्रित किया। पहले श्री राधा रानी ने मना कर दिया, क्योंकि श्री कृष्ण ने एक बार झूलन को तीव्र गति से झूला दिया था, उन्हें यह स्मरण था। श्री कृष्ण ने तब वचन दिया था कि वह झूलन को अधिक ऊंचा नहीं होने देंगे लेकिन गोपियों ने कहा कि वे स्वयं झूलन को धक्का देंगी और उसे अधिक ऊंचाई पर जाने नहीं देंगी । बहुत अनुरोध करने के बाद, श्री राधा रानी आखिरकार हर किसी के अनुरोध पर सहमत हुई और श्री कृष्ण के सामने झूलन पर पधारीं।

तब सखियों ने धीरे से पीछे की तरफ झूलन करना शुरू कर दिया और सब अत्यंत आनंद लेने लगे। जब श्री कृष्ण ने देखा कि राधा रानी और सखी झूलन का आनंद लेते हुए सुख और आनंद की मनोदशा में थे, तो झूलन को उन्होंने धीरे-धीरे ऊंचाई पर ले जाना शुरू किया। बहुत ही कम समय के भीतर सब सखियों के समझने से पहले ही झूलन इतना ऊंचा हो गया कि कोई भी रास्ता नहीं था कि वे उसे नियंत्रित कर सकें। जैसे ही झूलन अधिक हो गया, श्री राधा रानी ने श्री कृष्ण को रोकने के लिए कहा, लेकिन श्री कृष्ण सिर्फ प्रसन्नचित्त मुस्कुराते रहे और झूलन भी ऊंचाई पर था । अचानक झूलन इतनी ऊंचाई पर पहुंच गया कि यह दिखाई देता था कि यह वृक्ष की शाखा के शीर्ष पर एक पूर्ण चक्र होगा। उस क्षण में श्री राधा रानी ज़ोर से चिल्लाई और आगे बढ़ते हुए, श्री कृष्ण को उन्होंने पकड़ लिया । उसी क्षण झूलन वृक्ष की चोटी के ऊपर एक पूर्ण चक्र चला गया और दूसरी तरफ नीचे आ गया। सखियाँ यह देखकर चकित हो गयी । जब झूलन अंत में धीमा हो गया, राधा रानी अभी भी श्री कृष्ण को अपने हृदय से लगा कर उन्हे ज़ोर से पकड़ रखा था । यह सब देखकर सखियाँ बहुत प्रसन्न हुई। उस क्षण में, जो कुछ हुआ था, उसे देखकर, रूप गोस्वामी के शरीर और मन में रोमांच हुआ, अचानक वह चेतना खो गए और जमीन पर गिर गए। जब रूप गोस्वामी ने अंततः अपने इंद्रियों को पुनः प्राप्त किया, तो उन्होने देखा कि श्री राधा रानी और  श्री कृष्ण अपनी सखियों के संग वहां से जा चुके थे, लेकिन झूलन अभी भी वहीँ था। इसके बाद, उन्होंने देखा कि झूले को पकड़ने वाली शाखा पूरी तरह से मुड़ गई थी क्योंकि झूलन की शक्ति के कारण यह ऊपर और नीचे की तरफ एक पूर्ण चक्र में परिवर्तित हो गया था।
इस लीला को रूप गोस्वामी ने देखा एवं इमली का वृक्ष बहुत प्रसिद्ध हो गया था और हर तीर्थयात्री जो राधा-कुंड को जातें हैं, इमली तला के दर्शन ज़रूर करते हैं । दुर्भाग्य से, मध्य सत्तर के दशक के दौरान, यह इमली वृक्ष अभी नहीं है । फिर भी, आज भी यहाँ तीर्थ यात्री जिस स्थान पर यह लीला हुई है उसे देखने और याद करने जाते है।