"राधा नाम ही सों काम" - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०१)

"राधा नाम ही सों काम" - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०१)

(राग देस)
राधा नाम ही सों काम ।
राधा नाम परम धन मेरे कल्पद्रुम अभिराम  ॥
राधा नाम लिए सुख दरसे श्री वृन्दावन धाम ।
ललित किशोरी रटो निरन्तर राधा राधा नाम ॥

- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (201)

श्री राधा नाम से ही मेरा एक मात्र काम है। राधा नाम ही मेरा परम धन है क्यूंकि यह कल्पद्रुम (वह वृक्ष जो सारी कामनाओं को पूरा कर देता है) के समान है और अत्यंत ही शीतलता एवं सुख प्रदान करने वाला नाम है। हृदय से राधा नाम लेते ही प्रिया प्रियतम को सुख प्रदान करने वाले दिव्य वृन्दावन का सुखद दर्शन होने लगता है। ललित किशोरी जी कहते हैं कि "राधा" नाम में किशोरीजी बैठी हैं ऐसा विश्वास करके इसका निरंतर रटन करो।