जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार  - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (14)

जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (14)

जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार ।
आपकी जय हो, जय हो, हे अलबेली सरकार श्री राधे, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तेरी महिमा अपरंपार बलिहार बलिहार ।
आपकी महिमा अपरंपार है, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तेरी ब्रम्ह करे जयकार बलिहार बलिहार ।
परम ब्रम्ह भी आपकी जय जयकार कार रहे हैं, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तेरा अधाधुंध दरबार बलिहार बलिहार ।
आपके दरबार मे अधिकारी और अनधिकारी का कोई भेदभाव नहीं है, सब पर समान रूप से कृपा बरस रही है, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

कछु घटि न जाय दे प्यार बलिहार बलिहार ।
आप सब को प्रेम दान कर रही हैं, लेकिन फिर भी आपमें रंच मात्र भी प्रेम कम नहीं हो रहा है, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तू तो करुणा की अवतार बलिहार बलिहार ।
आप तो मूर्तिमान करुणा हैं, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तव चाकर नंदकुमार बलिहार बलिहार ।
नन्द कुमार श्री कृष्ण भी आपकी सेवा में तत्पर हैं, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

तू पतितन की रखवार बलिहार बलिहार ।
आप पतितों को पावन करनेवाली हो, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

अब खोल कृपा भंडार बलिहार बलिहार ।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं "हे श्री राधे, अब मेरे लिए भी कृपा का भंडार खोल दीजिये, आपकी बलिहार है, बलिहार है।"

क्यों कृपण 'कृपालुहिं' बार बलिहार बलिहार ॥
हे श्री राधे, मेरी कृपा की बारी आने पर आप क्यूँ कृपण हो रही हैं, आपकी बलिहार है, बलिहार है।

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी  3 (14)