श्री वृन्दावन वास दीजिये अब यही हमारी आशा है - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (22)

श्री वृन्दावन वास दीजिये अब यही हमारी आशा है - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (22)

(राग जिला)
श्री वृन्दावन वास दीजिये, अब यही हमारी आशा है।
यमुना तीर सुछाय माधुरी, जहँ रसिकों का वासा है ॥ [1]
सेवाकुञ्ज मनोहर निधि वन, जहाँ इक रस बारो मासा है ।
'ललित किशोरी' अब यह दिल बेकल, जुगल रूप रस प्यासा है ॥ [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (22)

श्री ललित किशोरी श्री राधा से विनम्र प्रार्थना करती हैं—
हे राधे! हमें श्रीवृन्दावन का वास प्रदान करें। यही हमारी एकमात्र अभिलाषा है—जहाँ यमुना का सुरम्य तट और रसिकजन का आनंदमय संग है। [1]

जहाँ सेवाकुञ्ज और मनोहर निधिवन हैं, जहाँ बारहों महीने युगल-रस की अविरल धारा प्रवाहित होती है। ‘ललित किशोरी’ कहती हैं—यह हृदय अब अत्यंत व्याकुल है और श्री युगल के रूप-रस का प्यासा है। [2]