दुर्लभ दुर्घट सबनि तैं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (05)

दुर्लभ दुर्घट सबनि तैं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (05)

दुर्लभ दुर्घट सबनि तैं, वृन्दावन निजु भौन।
नवल राधिका कृपा बिनु, कहिधौं पावै कौन॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (05)

श्री श्यामा-श्याम का निज महल यह वृन्दावन सबके लिए दुर्लभ और दुसाध्य है। नवल श्री राधा की कृपा के बिना इसे कौन प्राप्त कर सकता है?