जेहि रस लगी हरि हर तरसत - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

जेहि रस लगी हरि हर तरसत - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

“ जेहि रस लगी हरि हर तरसत, बरसत एहि दरबार | ”
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि भी जिस दिव्य आनंद रसामृत के लिए लालियत रहते हैं, वह रस श्री राधा रानी के दरबार में नित्य बरस रहा है।