यहाँ जब महादेव नंद भवन में लाला के दर्शन करने गए तो यशोदा मैया ने मना कर दिया कि हमारा लला बहुत छोटा है और आपके दर्शन से डर जाएगा तो महादेव यहाँ इस आस में आसन लगा कर बैठ गए कि श्री कृष्ण हमारी सुनेंगे और दर्शन देंगे। अतः आसेश्वर कहलाए।
महादेव जी के जाते ही लाला ने जोर जोर से रोना शुरु कर दिया । माता ने सब उपाय किए तो भी चुप ना हुआ सब ने कहा कि वहाँ एक बाबा बैठा है। बाबा के माथे पर चंदा और जटाओं में गंगा है। शायद वह लाला को ठीक कर दे। तब यशोदा जी ने उन्हें फिर बुलाया, शिव जी फिर आए और श्याम सुंदर के सामने उन्होंने श्री राधा जी का यश गान किया।
श्याम सुंदर हुंकार भरते रहें और फिर राधा कह कर रोने लगे। माता ने पूछा लाला क्यों रो रहा है? माता नहीं समझ पाई इस बात को शिव जी समझ गए कि यह तो हमने राधा नाम का जादू मारा है इसलिए रो रहा है। मैया ने कहा जोगी तू ही कुछ कर। शिव जी बोले हम तुम्हारे लाला को चुप करा देते हैं तब मैया ने महादेव जी का हाथ लाला के मस्तक पर फहराया और शिव जी ने किशोरी जी की नामावली सुनाई तुरंत वह लाला शांत हो गए।
स्थान:
आसेश्वर महादेव नंदगाँव से करीब 1 किमी दूर स्थित है। यह नंदगाँव तीर कदम्ब के बहुत पास है।

