देह कुंड बरसाना के पास ऊंचा गाँव में स्थित है। यह ललिता सखी का गाँव है। यहां एक बार एक ब्राह्मण ने श्री कृष्ण से कहा, मेरी बेटी विवाह योग्य है, क्या आप मुझे कुछ धन दे सकते हैं? श्री कृष्ण ने कुछ विचार कर कहा, "श्री राधा" ही मेरी एकमात्र संपत्ति हैं, उनके अलावा, मेरे पास कोई मूल्यवान वस्तु नहीं है। "उन्होंने उस ब्राह्मण से कहा ," मैं आपको सिर्फ थोड़ा पैसा ही नहीं अपना पूरा भाग्य देना चाहता हूं। " तब श्री राधा की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "यह मेरी पूरी संपत्ति और धन हैं, कृपया इन्हे स्वीकार करें।" राधा के सिवा मेरे पास कोई प्रिय वस्तु नहीं है।
जब गरीब ब्राह्मण ने यह सुना, तो उसने उदासी में अपने सिर को पीटना शुरू कर दिया। उसने कहा: "मैं अपनी बेटी के लिए उपयुक्त पति की व्यवस्था भी नहीं कर सका अर्थार्त बेटी के लिए वर नहीं ढूंढ सका"। इस तरह श्री कृष्ण ने श्री राधा के वजन के बराबर ब्राह्मण को स्वर्ण दिया। जब राधारानी ने यह सुना कि ठाकुरजी ने उनकी तुलना किसी "वस्तु" से की है तो उन्हें क्रोध आ गया। जिसके बाद ठाकुरजी ने अपनी गलती को अनुभव किया और फिर उन्होंने अपनी प्यारीजु से क्षमा याचना कर रासलीला का आयोजन किया । देह कुंड वह जगह है जहाँ श्री कृष्ण ने श्री राधारानी के वजन के बराबर सोना दान दिया था। यही कारण है कि इस जगह को देह कुंड के नाम से जाना जाता है। श्री राधा के वजन के बराबर स्वर्ण दान करने की इस लीला के कारण, पास के मंदिर को देह-बिहारी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां माना जाता है कि इस स्थान पर स्वर्ण दान करना बहुत शुभ है।
स्थान:
देह कुंड ऊंचा गाँव में स्थित है और ऊंचा गाँव में श्री ललिता सखी के मंदिर से नीचे है। ऊंचा गाँव बरसाना से एक मील पश्चिम में स्थित है।

