“ श्री वृंदावन वास दीजिये, आस यही वृषभानुदुलारी |
वंशीवट तट नटनागर संग करत केली अवलोकोँ प्यारी ||”
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (४)
ओह श्री राधा, आप मुझपे कृपा कब करेंगे, जब मैं वृंदावन में रहूंगा और वंशीवट में श्री कृष्ण के साथ आपकी दिव्य लीला को देखूंगा।
वंशीवट तट नटनागर संग करत केली अवलोकोँ प्यारी ||”
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (४)
ओह श्री राधा, आप मुझपे कृपा कब करेंगे, जब मैं वृंदावन में रहूंगा और वंशीवट में श्री कृष्ण के साथ आपकी दिव्य लीला को देखूंगा।

