अंग अंग सब लाल के - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (12)

अंग अंग सब लाल के - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (12)

अंग अंग सब लाल के, झुकत प्रिया की ओर।
सहज प्रेम कौ ढार परयौ, बँधे नेह की डोर॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (12)

श्री श्यामसुन्दर का अंग-अंग श्री प्रिया की ओर झुका रहता है, अर्थात् वे सम्पूर्ण रूप से श्री प्रिया में आसक्त रहते हैं। उनके मन में सहज प्रेम का ढाल लगा हुआ है, अर्थात् उनके मन की सम्पूर्ण वृत्तियाँ श्री प्रिया की ओर दौड़ती रहती हैं। इसका कारण यह है कि वे प्रेम की डोर से बँधे हुए हैं।