अलं विषय वार्तया नरक कोटि वीभत्सया  - राधा सुधा निधी -83, हित हरिवंश महाप्रभु

अलं विषय वार्तया नरक कोटि वीभत्सया - राधा सुधा निधी -83, हित हरिवंश महाप्रभु

अलं विषय वार्तया नरक कोटि वीभत्सया, वृथा श्रुति कथाश्रमो बत विभेमि कैवल्यतः।
परेश-भजनोन्मदा यदि शुकादयः किं ततः, परंतु मम राधिका पदरसे मनो मज्जतु॥

- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (83)

विषय-चर्चा बहुत हो चुकी, इसे बन्द करो क्योंकि यह कोटि-कोटि नरकों के समान घृणित है । श्रुति-कथा भी व्यर्थ श्रम ही है । अहो हमें तो कैवल्य मुक्ति से भय प्रतीत होता है (क्योंकि वह नाम-रूप रहित है)। परम पुरुष भगवान् के भजन में उन्मत्त यदि कोई शुक आदि हैं, तो रहने दो; हमें उनसे क्या प्रयोजन हमारा मन तो केवल श्रीराधा के पद रस में ही डूबा रहे। (यह अभिलाषा है।)